जैसे सूर्य सबको समान प्रकाश देता है, वैसे ही भगवान की कृपा सब जीवों पर समान रूप से बरसती है।
अमृत वचन
जैसे सूर्य सबको समान प्रकाश देता है, वैसे ही भगवान की कृपा सब जीवों पर समान रूप से बरसती है।
नाम स्मरण से चित्त निर्मल होता है और निर्मल चित्त में ही प्रेम का प्रकाश प्रकट होता है।
सेवा वही है जिसमें अपना मान नहीं, प्रभु की प्रसन्नता ही एकमात्र लक्ष्य हो।
सत्संग मनुष्य को भीतर से बदलता है; यह जीवन में शांति और सद्बुद्धि का मार्ग खोलता है।
श्रद्धा और धैर्य से किया गया छोटा प्रयास भी प्रभु कृपा से महान फल देता है।
जिस हृदय में दया, नम्रता और प्रेम है, वहीं सच्चे धर्म का निवास है।
वाणी मधुर हो, मन सरल हो और कर्म सेवा में लगे हों, यही साधना का सुंदर रूप है।
ईश्वर को पाने का मार्ग दूर नहीं; अपने भीतर के अहंकार को शांत करना ही पहला कदम है।